ज़ियारत की मुख्य विशेषताएं
इमाम महदी (अ.स.) इसमें अपने दादा के जिस्म पर लगे तीरों और तलवारों के घावों का ज़िक्र करते हैं।
यह शेख अल-मुफीद (मृत्यु 413 हिजरी) की पुस्तक अल-मज़ार , शेख मोहम्मद इब्न अल-मशहदी की अल-मज़ार अल-कबीर और सैय्यद इब्न तावूस की मिस्बाह अल-ज़ैर में वर्णित है।
पूरी ज़ीयारत काफी लंबी है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इसके कुछ मुख्य अंशों का हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ नीचे दिया गया है: ziyarat e nahiya in hindi
ज़ियारत-ए-नाहिया महज़ एक रस्म नहीं बल्कि कर्बला के मजलूमों के साथ अपनी वफ़ादारी और इमाम-ए-ज़माना (अ०स०) के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करने का जरिया है। इंटरनेट पर "ziyarat e nahiya in hindi" की खोज करने वाले पाठकों को इसके अर्थ और इसके पीछे की रूहानियत को गहराई से समझना चाहिए ताकि मुहर्रम और सफ़र के महीनों में उनका शोक और अधिक बा-मकसद (उद्देश्यपूर्ण) बन सके।
इमाम हुसैन के ग़म में रोना और इस ज़ियारत को कसरत से पढ़ना गुनाहों के कफ़ारे का ज़रिया बनता है। निष्कर्ष (Conclusion)
ज़ियारत-ए-नाहिया के कुछ प्रमुख अंश (हिंदी अर्थ के साथ) ziyarat e nahiya in hindi
"अस्सलामू अलल हुसैनिल लज़ी समाहत नफ़्सुहु बिमुहजतिही..."
"सलाम हो आदम पर जो अल्लाह के चुने हुए हैं। सलाम हो नूह पर जिनकी दुआ कुबूल हुई। सलाम हो इब्राहिम पर जो अल्लाह के खलील (मित्र) हैं। सलाम हो हुसैन पर जिन्होंने अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी।"
4. इमाम महदी (अ.स.) का विलाप ziyarat e nahiya in hindi
सलाम हो आदम पर, जो अल्लाह की मख्लूक में चुनिंदा हैं।
چونکہ یہ زیارت خود امامِ وقت کے الفاظ ہیں، اس لیے اس کو پڑھنے سے امام مہدیؑ کی معرفت اور ان سے قربت حاصل ہوتی ہے۔